दिन 9/5/2019 बृहस्पतिवार, क्षेत्र – अलीगढ़, स्थान -सारसौल चौराहा, समय – दोपहर करीब एक बजे।
आगे हिस्ट्रीशीटर बदमाश वीरेंद्र उर्फ़ बलिया और पीछे सरकारी पिस्तौल लेकर भीड़ भरे चौराहे पर उसका पीछा करतीं इंस्पेक्टर Aruna Rai और उनकी टीम।

इतना पढ़कर आपको फ़िल्म ‘सिंघम’ के दृश्यों की याद आ जाएगी। लेकिन अलीगढ़ के उस चौराहे पर चलने वाला यह दृश्य पूरे 40 मिनट तक चलता रहा। हाल ऐसा कि बाज़ार में हलचल मच गयी और लोगों ने इंस्पेक्टर अरुणा को कहा – लेडी सिंघम।

दोपहर एक बजे एसआई पवन कुमार, अंकित और कॉन्स्टेबल गौरव के साथ इंस्पेक्टर अरुणा थाने से निकलीं तभी खैर के बिसारा निवासी बलिया की कार नज़र आयी। इसे रुकवाकर पूछताछ के लिए पुलिसकर्मी जीप से बाहर आये तो बलिया ने कार चढ़ाने की कोशिश की और भाग निकला। कार के पहिये से सिपाही गौरव का पैर जख़्मी हो गया। एसआई अंकित ने आनन-फानन में राहगीर की बाइक से बदमाश का पीछा किया। बाकी टीम जीप से पीछे लगी थी। इस दौरान कुख्यात की कार ने कई राहगीरों को चपेट में ले लिया। सारसौल चौराहे के निकट गाड़ी जाम में फंस गयी तो बलिया उतर कर पैदल सैटेलाइट बस स्टैंड से होकर भागने लगा।
इसपर पिस्टल लेकर इंस्पेक्टर भी दौड़ पड़ीं और कुछ दूर बाद उसे घेर लिया। यह दृश्य कितना उत्साहवर्धक और ऊर्जा से भर देने वाला होगा इसकी कल्पना ही कर सकती हूं। जो उनकी जांबाज़ी को वहां देख रहे थे वो देखते रह गये। वे जैसे ही बदमाश का गिरहबान पकड़तीं, शातिर ने पिस्टल तान दी।

इस वक़्त अरुणा का हाथ बलिया के गिरहबान पर और बलिया का हाथ इंस्पेक्टर अरुणा की ओर तने पिस्टल पर था। दूरी मात्र एक फ़ीट। दो मिनट के लिए लगा कि अब कुछ भी हो जाएगा तबतक कॉन्स्टेबल गौरव ने बलिया से उसकी पिस्टल छीन ली। 40 मिनट के संघर्ष के बाद वह गिरफ़्तार हो गया।
ऑपरेशन पूरा हुआ और लोग अलीगढ़ की सड़कों पर हाथ में पिस्टल लहराती, पूरी जान लगाकर बदमाश के पीछे भागती उस वर्दीधारी निरीक्षक के मुरीद हो गये।

Riwa S Singh-की कलम से

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