भिक्षावृति समाज में पनप रहे एक कोढ़ की तरह है उससे भी ज्यादा गलत है बच्चों से भीख मंगवाना। अक्सर देखा गया है कि सड़कों के किनारे या फिर चैराहों पर छोटे-छोटे बच्चे हाथ फैलाकर भीख मांगते देखे जाते हैं। उस वक्त तो स्थिति और भी कष्दायक हो जाती है जब ये छोटे-छोटे बच्चे किसी व्यक्ति या महिला के इर्द-गिर्द काफी दूर तक गिड़गिड़ाते हुये ‘रात से खाना न खाने’ ‘पापा के बीमार होने का वास्ता देते हैं ’। कुछ ऐसे भी बच्चे देखे जाते हैं जिन बच्चों की गोद में एक या दो साल का बच्चा होता है और वो उसके भूखे होने का वास्ता देते हैं, लिहाजा मजबूरन उन्हें कुछ न कुछ देना ही पड़ता है। ये हालात उत्तराखण्ड ऐसे पयर्टन स्थल में कुछ ज्यादा ही बद से बदत्तर हैं आलम ये है कि दूर-दराज से यहां आने वाले पर्यटकों का तो ये निकलना भी दूभर कर देते हैं। इसका संज्ञान लेते हुये उत्तराखण्ड पुलिस ने बाल भिक्षावृति रोकने के लिए एक खाका तैयार किया जिसे नाम दिया गया ‘आपरेशन मुक्ति’ पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था श्री अशोक कुमार जी ने 1 मई से इसे लागू कर दिया और प्रदेश के सभी पुलिस कप्तानों से संबधित थाना प्रभारियों को निर्देशित करके बाल भिक्षावृति को रोकने के लिए सखती के साथ अभियान चलाये जाने को कहा। इसी कड़ी में टिहरी जनपद के सभी थानाक्षेत्रों में बाल भिक्षकों को चिन्हित करने के लिए मुहिम चलाई जा रही है इस मुहिम के अन्र्तगत बस स्टैन्डों और भीड़ भरे स्थानों पर उत्तराखण्ड पुलिस के जवान निगरानी रख रहे हैं। साथ ही टिहरी जनपद के सभी थाना क्षेत्रों में पोस्टर लगाकर इस मुहिम से लोगों में भिक्षवृति को रोकने के लिए जागरूकता पैदा करने और इस मुहिम में उनकी सहभागिता के लिए भी प्रेरित कर रहे है।

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