कांग्रेस एवं भाजपा में क्या है अंतर क्यों भाजपा पूरे देश में जीत का परचम पहरा रही हैं ।
आजकल घर घर में टेलिविजन , केबल कनेक्शन एवं मोबाइल फोन ने पूरे भारत के घरों में अपनी जगह बना ली है और भारतीय जनता पार्टी ने इसका बखूबी इस्तेमाल किया है, इसमें भा जा पा का पूरा पूरा सहयोग इलेक्ट्रॉनिक न्यूज़ चैनल वालों ने किया है ।
भारतीय जनता पार्टी ने समाचार पत्रों के पत्रकारो एवं न्यूज़ चैनल के मालिकों को बनाया अपनी पार्टी का ब्रांड एंबेसडर यानी पार्टी के गुण गाने वाला एजेंट सरकार की छोटी-छोटी उपलब्धियां इतना बढ़ा चढ़ाकर दिखाई जाती है एवं अखबारों के माध्यम से पढ़ाई जाती है यह सब चीज़ें आम नागरिक तक पहुंचती है और भाजपा का वोटर दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है ,वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी पत्रकारों से एवं इलेक्ट्रॉनिक चैनलों के मालिको से दूरी बनाती जा रही है ,इसलिए कांग्रेस का वोट बैंक धीरे-धीरे खिसकता जा रहा है , यही हाल रहा तो एक समय यह आएगा लोग चाहे किसी भी धर्म के हो अमीर हो गरीब हो ,मजदूर हो या किसान हो ,बस एक ही पार्टी की बात करेंगे और वह पार्टी होगी भारतीय जनता पार्टी ।
कांग्रेस की सोच रखने वाले लोग यह कहते है , मीडिया बिक गया
वह गलत नहीं कहते पर मीडिया की भी मजबूरी है , टीवी चैनलों एवं समाचार पत्रों के मालिकों की जिनको महीने के करोड़ों रुपए खर्च करना पड़ते हैं ,फिर जाकर आपके हाथ में समाचार पत्र या न्यूज़ बुलेटिन देखने को मिलता है मैं प्रिंट मीडिया से जुड़ा हुआ हूं इसलिए मैं आपको समाचार पत्रों के खर्चो के बारे में बताता हूं एक 36 पेज का समाचार पत्र आपके द्वार पहुंचने तक ₹25 का खर्चा एक समाचार पत्र को छापने एवं आप तक पहुंचाने में आता है और आप एक समाचार पत्र के लिए ₹3 के हिसाब से भुगतान करते हैं ,समाचार पत्र के मालिक को ₹22 प्रति समाचार पत्र नुकसान होता है , इसकी भरपाई केवल विज्ञापनों से होती है ,पर मध्य प्रदेश सरकार जो कांग्रेस की है और मुख्यमंत्री कमलनाथ ने समाचार पत्रों के मालिकों एवं पत्रकारों से इतनी दूरी बना ली है और विज्ञापन भी महीने के गिने-चुने दिए जाते हैं वह भी बड़े समाचार पत्रों को ,रहा सवाल छोटे एवं मझोले समाचार पत्रों का उनके विज्ञापन तो पूरी तरीके से बंद कर दिए गए हैं ,इसके बावजूद कांग्रेसी नेता समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रानिक न्यूज़ चैनलों से यह उम्मीद लगाते हैं की समाचार पत्र कांग्रेस की तारीफ लिखें और इलेक्ट्रॉनिक न्यूज़ चैनल वाले उनकी खबरें बढ़ा- चढ़ाकर दिखाएं ।
आइए आपको भारत के पहले समाचार पत्र के बारे में बताये जो 18 26 ई में शुरू हुआ
था ,भारत में अखबारों के जनक पंडित युगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता से शुरुआत की इसके बाद भारत की आजादी में समाचार पत्रों ने बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया था ।
अमित शाह को इस दौर के चाणक्य कहना गलत नहीं होगा अमित शाह एवं मोदी ने तकरीबन 15 साल पहले केंद्र में सरकार बनाने का खाका तैयार करने में जुट गए थे , इसमें बहुत सारी विदेशी एजेंसियों ने भाजपा की मदद की और उनके कहे अनुसार सबसे पहले उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को पैकेज देने की परंपरा शुरू की चाहे वह विज्ञापन के रूप में हो या प्रायोजक के , इन चाणक्यो ने मीडिया की सबसे बड़ी कमजोरी की नस पकड़ी और इसका फायदा आज तक उठा रहे हैं ,अगर कांग्रेस पार्टी नहीं जागी तो सब जानते हैं इस देश में कांग्रेस का क्या हाल होगा।

मोहम्मद जावेद खान
संपादक
9009626191

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