एक जुलाई, 2017 को कृषि कल्याण सेस ख़त्म कर दिया गया था, लेकिन आरटीआई से मिली जानकारी बताती है कि जनता से अब भी यह टैक्स वसूला जा रहा है.केंद्र की मोदी सरकार ने कृषि कल्याण सेस ख़त्म किए जाने के बाद भी इसके तहत जनता से 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा का टैक्स वसूला है. द वायर द्वारा दायर किए गए सूचना का अधिकार आवेदन में इसका खुलासा हुआ है।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा धीरे-धीरे कई सारे सेस ख़त्म कर दिए गए थे. कृषि कल्याण सेस को भी एक जुलाई, 2017 से ख़त्म कर दिया गया था।

हालांकि वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के ‘सिस्टम और डेटा प्रबंधन के निदेशालय जनरल’ ने आरटीआई आवेदन के तहत जानकारी दी है कि एक जुलाई, 2017 के बाद 1340.55 करोड़ रुपये का स्वच्छ भारत सेस वसूला गया है।

इसके अलावा वित्त मंत्रालय द्वारा 7 जून 2017 को जारी एक प्रेस रिलीज में भी बताया गया है कि जीएसटी को लागू करने के लिए एक जुलाई, 2017 से कृषि कल्याण सेस समेत कई सारे सेस ख़त्म किए जा रहे हैं।

हालांकि, सिस्टम और डेटा प्रबंधन के निदेशालय जनरल द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक एक जुलाई 2017 से लेकर जनवरी 2019 तक में 1340.55 करोड़ रुपये का कृषि कल्याण सेस वसूला गया है. कृषि कल्याण सेस ख़त्म किए जाने के बाद भी इसके तहत पैसा वसूलना सरकार पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

बता दें कि साल 2016 में कृषि कल्याण सेस लागू किया गया है. इसके तहत सभी सेवाओं पर 0.5 फीसदी का सेस लगता है।

सरकार का कहना है कि कृषि योजनाओं की फंडिंग और कृषि सुधार के लिए संबंधित पहल को बढ़ावा देने के लिए इस सेस को लागू किया गया था।

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