रायपुर — यूँ तो गौ माता की जयकारा लगाने वाले काफी संख्या में लोग मिल जाते हैं लेकिन गौवंश को अपने परिवार की अहम हिस्सा समझने वाले लोग विरले ही मिलते हैं। छत्तीसगढ़ गो सेवा संगठन के जांजगीर-चांपा जिला मीडिया प्रभारी शिखा चैतन्य द्विवेदी के अनुसार दाऊचौरा खैरागढ़ निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पिंकी ठाकुर ने बताया कि उनके परिवार की सुबह ही गौमाता के दर्शन से होता है । पंडित घनश्याम प्रसाद तिवारी ने अपने पुत्र के जन्मदिन पर 17 फरवरी 2012 को गौमाता गौरी का दान किया था , तब से उनके घर में गौ सेवा का कार्य प्रारंभ हुआ । कुछ दिन बाद श्यामा भी घर आ गयी और उसके बाद अब स्वधा गौमाता भी घर पर है। इनकी पुत्री तान्या ठाकुर का ज्यादा समय गो सेवा में व्यतीत हुआ । शायद इसी गौ सेवा का ही परिणाम है कि पिंकी ठाकुर के पति को सेंट्रल स्कूल खैरागढ़ में नौकरी भी मिल गया । पिंकी ठाकुर ने बताया कि अभी गौरी के छ: बच्चे , श्यामा के चार बच्चे और स्वधा के दो बच्चे हैं । लेकिन स्वधा गौमाता इतनी सीधी है कि सभी के बच्चों को एक साथ अपना दूध पिलाती है। गौ माता और उनके बच्चे ठाकुर परिवार की भाषा अच्छी तरह से समझ लेते हैं । इनके घर गाय का बच्चा भी इनके साथ बिस्तर में ही सोता है ।
इसी तरह स्वागत बिहार डुंडा रायपुर निवासी अनीता वर्मा का परिवार भी गो भक्ति में डूबा रहता है । इनके यहाँ तो कक्षा तीसरी में पढ़ने वाला अक्षत वर्मा गौमाता के बच्चे नमो के लिये भात का बड़ी स्वयं बनाता है जो नमो को बहुत पसंद है । इनके पति रमेश वर्मा भी समय-समय पर सड़क दुर्घटना होने पर गौ माता की सेवा में तत्पर रहते हैं । इनकी बेटी भूमि भी घर में गौ सेवा करती है । कुल मिलाकर यह दोनों परिवार गौ माता की सेवा करके मिशाल कायम कर रहे हैं जो अन्य लोगों के लिये प्रेरणास्रोत है ।

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

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