एक 14 साल की बेसहारा मासूम और उस पर दर्दनाक दरिंदगी की इन्तहां..जी हाँ
कुछ ऐसा ही हुआ है इस मासूम लड़की के साथ..शरीर का एक एक हिस्सा चीख चीख कर इंसान रूपी जानवर की दरिंदगी की गवाही दे रहा है..आज से करीब 6-7 महीने पहले काकादेव की साधना पता नहीं कैसे और कहां से इस बच्ची को अपने घर ले आयी..घर के काम काज करवाने के दौरान ही बच्ची पर साधना और उसके बेटों के रूप में समाज में रह रहे इंसान रूपी जानवर ने कहर बरपाना शुरू किया..पिछले 6 से 7 महीनों में इस बच्ची ने न जाने कितना दर्द बर्दाश्त किया..कभी जीने से नीचे धकेली गयी तो कभी गर्म चिमटे से शरीर को दागा गया तो कभी गर्म पानी डाल कर बेल्ट से पीटा गया तो कभी गर्म तवे से तड़पाया गया..पीठ पर और शरीर के अन्य हिस्सों पर बने घाव और उसके निशान चीख रहे हैं कि इस मासूम पर जुल्म की हर इंतिहा पार कर दी गयी है..चोटें इतनी ज्यादा हैं कि बच्ची ठीक से बोल पाने में भी असमर्थ है..बच्ची के मासूम शरीर पर घावों को देखकर ऐसा लगता है जैसे बच्ची पर जुल्म करने वाले खुद को इस समाज का सबसे बड़ा दरिंदा साबित करना चाहते थे..
इस पूरे प्रकरण पर लगातार संघर्ष कर रहे Shyam Shukla जी, सीमा त्रिपाठी जी, मनीषा मिश्रा जी एवं Adv Thakur Vandana Solanki जी, Taranjeet Singh जी, Sandip Kumar Tiwari जी, pooja dubey के साथ कल रात मासूम इस बच्ची को देखने हैलट हॉस्पिटल गया..पुलिस ने दबाव में मामला दर्ज कर लिया लेकिन जब जुल्म का शिकार बेसहारा हो तब पुलिस की संवेदना भी मुर्दा हो जाती है..बच्ची पर जुल्म की हैवानियत देखकर आंखें नम थीं पर दुख से ज्यादा मन मे आक्रोश था..इस बात पर की क्या हम इतने कमजोर हो गए हैं कि समाज में कुछ मुट्ठी भर दरिंदे हमारी बेटियों की बोटियाँ यूं ही नोचते रहेंगे..और हमारा खून उबाल तक नहीं मार रहा है..?
और ये कानपुर वालों को क्या हो गया है..?
आपके ही शहर में एक बच्ची को दरिंदगी की हद तक तड़पाया गया..और आपका खून नहीं खौल रहा है..?
चेक करवाइए..खून ही बह रहा है न नसों में..
अगर नसों में खून उबाल मार जाए और लगे कि इस बेसहारा बच्ची की कुछ मदद कर सकते हैं आप..तो आप व्यक्तिगत तौर पर भी बात कर सकते हैं..क्यों कि बच्ची को आपकी संवेदना ही नहीं बल्कि आपका साथ भी चाहिए इस संघर्ष में…!
अतुल आक्रोश..

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