भोपाल — बाबूलाल गौर के निधन की खबर से भाजपा में शोक की लहर है उनके निधन से मध्यप्रदेश की सियासत में एक युग का अंत हो गया। एक ऐसी शख्सियत जिसकी पहचान देशभर में केवल एक नेता के तौर पर नहीं बल्कि जननेता के तौर पर होती थी।
02 जून 1930 को उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के नौगीर ग्राम में जन्में बाबूलाल गौर अपने पिता रामप्रसाद गौर के साथ भोपाल के पुठ्टा मिल में काम करने आये थे जहाँ उन्हें भेल (भारतीय हेवी इलेक्ट्रिक लिमिटेड) में नौकरी मिली। भेल में बाबूलाल गौर मजदूरों की आवाज बन गये। वर्ष 1946 से ही वे आरएसएस (RSS) से जुड़ गये थे और भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं । वर्ष 1971 में जनसंघ ने पहली बार उन्हें भोपाल विधानसभा का टिकट दिया जिसमें वे करीब 16000 वोटों से हार गये। इसके बाद 1974 में दोबारा भोपाल की गोविंदपुरा सीट से उपचुनाव में मैदान में उतरे और जीत हासिल की लेकिन ये महज एक जीत नहीं थी बल्कि एक ऐसी शुरुआत थी जो अब तक उस सीट पर चली आ रही है। साल 1975 में जेपी आंदोलन में बाबूलाल गौर जेल भी गये । जबकि जनसंघ में कुशाभाऊ ठाकरे से लेकर पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के वे सबसे करीब लोगों में गिने जाते थे। 1977 का चुनाव उन्होंने जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लड़ा और जीत हासिल की. प्रदेश में सरकारे आती रही जाती रही. चुनाव भी होते रहे. लेकिन बाबूलाल गौर चुनाव दर चुनाव भोपाल की गोविंदपुरा सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करते रहे। 2013 तक वो इस सीट से लगातार 10 बार विधानसभा चुनाव जीते जो मध्यप्रदेश में किसी एक व्यक्ति के सबसे ज्यादा बार विधानसभा चुनाव जीतने का रिकार्ड है। वे वर्ष 1990 से 1992 तक मध्य प्रदेश के स्थानीय शासन , विधि एवं विधायी कार्य , संसदीय कार्य , जनसंपर्क , नगरीय कल्याण, शहरी आवास तथा पुनर्वास एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री भी रहे हैं। उमा भारती के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद 23 अगस्त 2004 से 29 नवंबर 2005 तक उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री पद की कमान सम्हाली। अपने छोटे से कार्यकाल में भी उन्होंने कई ऐसे काम किये जिसके लिये उनकी सराहना उनके विरोधी भी करते हैं।
मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी वे शिवराज सिंह चौहान की सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री काम करते रहे उन्होंने अपने 46 साल के राजनीतिक सफर में अनेकों उतार-चढ़ाव देखे हैं।वर्ष 2018 के चुनाव में पार्टी ने उनकी जगह उनकी बहू कृष्णा गौर को टिकट दिया था जो वहां से पहली बार विधायक बनी है।

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

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