आज के इस भागम भाग के माहौल में रोज़गार के लिए हर कोई संघर्ष कर रहा है। आखिर उसे भी तो अपने बच्चे पालने हैं इस लिहाज से वह अपना छोटा ही सही बगैर तामझाम के व्यवसाय चुनना पसन्द करता है। जिसमें खर्च कम आमदनी ज्यादा हो ,भले ही वो खतरनाक जानलेवा हो या फिर गैरक़ानूनी क्यों न हीे। इस बात का उसे बिल्कुल ख्याल नहीं रहता। आपको एक उदाहरण दूं मान लीजिये कोई भी शख्स मोहलले में मसाला चक्की या तेल का स्पेलर लगाने के लिए बिजली कनेक्शन चाहता है तो उसे बिजली विभाग को मोहल्ले वालों से अनापत्ति का सबूत देना होता है। फिर जोखिम भरे और गैर क़ानूनी काम के लिये हमारी नज़रें क्यों फिर जाती हैं। जिसमें एक नहीं आस पास के कई घरों की ज़िन्दगी दांव पर लगी होती है। लेकिन स्वार्थ और सहुलियत के लिए लोग सारे नियम क़ानून ताख पर रख देते हैं। और अगर कोई हादसा हो जाये तो ये लोग बगलें झांकते नज़र आते हैं।हम बात कर रहे हैं अवैध रूप से चल रहे गैस रिफिलिंग के धन्धे की जो इस वक्त सबसे ज्यादा फल फूल रहा हैं। शहर का कोई ही ऐसा मोहल्ला होगा जहां पर धड़ल्ले के साथ ये धन्धा न चल रहा हो। बड़े गैस सिलेन्डरों से छोटे गैस जिलेन्डरों को खुले में रिफिल किया जाता है।जिसे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता है।सवाल ये उठता है कि जिस वक्त गैस की किल्लत होती है तब भी इन लोगों के धन्धे पर फर्क नहीं पड़ता ।दरअसल इन लोगों की गैस एजेन्सियों से सांठ गांठ रहती है। इन की दुकानों में बाकायदा गैस के रेट भी लिखे होते हैं जो 80 रूपये से लेकर 100 रूपये तक होते है। शाम ढ़लते ही इनकी दुकान में भीड़ लगना शुरू हो जाती है। कहने का आश्य ये है कि इन जगहो से रोज़ाना किसी न किसी अधिकारी का गुज़र होता होगा जिनकी निगाह इन दुकानों पर ज़रूर प़ड़ती हागीे लेकिन फिर भी ये लोग अपनी आंखें मूंदे हुये हैं जैसे किसी बड़े हादसे का इन्तज़ार कर रहे हों। जब -जब यह अवैध धन्धा सुर्खियों में रहा तब तब आपूर्ति विभाग ने इसका कसूरवार गैस एजेन्सियों को ठहराया है ये सही बात है। लेकिन इसके मूल में बात ये है कि आपूर्ति विभाग में तैनात निरिक्षकों की क्या कोई जिम्मेदारी नहीं बनती या फिर पुलिस विभाग अपने स्तर से इन लोगों के प्रति कार्रवाई करने में कोताही क्यों करते है। ं इससे एक बात साफ हो जाती है कि ये लोग अपने धन्धे की जड़ों को जमाने के लिये इनका सहारा लेते हैं। तभी तो ये लोग बैखौफ होकर धड़ल्ले से अपना कारोबार जमाये हुये है। गैस एजेन्सियों में आये दिन घटतौली की घटनायें सामने आती हैं। वो इसी का परिणाम है जबकि इसका खामियाजा गैस उपभोक्ता को भुगतना पड़ता है। फिलहाल दोषी कोई भी हो लेकिन जिस तरह से ये धन्धा गली मोहल्लों के अन्दर पांव पसार चुका है वो आने वाले दिनों में किसी बड़े हादसे का संकेत ज़रूर दे रहा है इसलिए आपूर्ति विभाग को आवश्यक कदम उठाते हुये ताबड़ तोड़ छापे मारकर इन अवैध रिफिलिंग के धन्धे को बन्द कराने की कारवाई अमल में लाना चाहिये।जिससे जान माल को होने वाले खतरे को टाला जा सके।

सलीम रज़ा

देहरादून उत्तराखण्ड

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