अभी हाल ही में संपन्न हुये लोकसभा चुनाव में कई ऐसे दिग्गज नेता थे जिनकी हसरतें चुनाव लड़ने के लिए परवान चढ़ रही थी, लेकिन भाजपा और संघ के बनाये नियम उनकी हसरतों के बीच दीवार बन गये और उनके दिल की हसरत दिल ही में रह गई। भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव से पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि 75 साल की उम्र पूरी कर चुके नेताओं को टिकट नहीं दिया जायेगा, वल्कि वो मार्गदर्शक मंडल में अपने अनुभवों को साझा करेगा। सही बात है युवाओं को आगे लाने का भाजपा का एजेन्डा स्वागत येग्य था, लेकिन ये क्या अपने 75 साल पूरे कर चुके कर्नाटक के नये ‘स्वामी’ येदियुरप्पा के लिए कानून क्यों दम तोड़ गया।

क्या यह सच है कि नियम बनाये जाते हैं तो सिर्फ तोड़ने के लिए, खैर बहुमत में ऐसा होना कोई नई बात नहीं है वो भी भाजपा के लिए। कहने ओर सुनने की बात बची ही कहां है यह सब जानते हैं कि भाजपा की मजबूती और बहुमत के साथ सत्ता में वापसी का पूरा क्रेडिट अमित शाह और नरेन्द्र मोदी को दिया जा रहा है। दिया भी जाना चाहिए, अमित शाह और मोदी की जोड़ी ने ही सियासत के नये आयाम स्थापित करते हुये बेंचमार्क तय किया था। शायद याद होगा इसी जोड़ी ने 75 साल पूरे कर चुके अडवाणी,मुरली मनोहर जोशी, को मार्गदर्शक मंडल में शामिल करा दिया था। लेकिन ये कैसा अपवाद है कि येदियुरप्पा को उनका आशीष मिल रहा है ऐसा क्यों ? ऐसे और भी बहुत सारे यक्ष प्रश्न बनकर उत्तर पाने की बाट जोह रहे हैं। क्या अब ये माना जाये कि उठाने और गिराने में माहिर खिलाड़ी येदियुरप्पा की उम्र भारतीय जनता पार्टी की मुश्कििलात नहीं बनेगी कैसे?।ं

उम्र की सीमा की लक्ष्मण रेखा तो लोकसभा चुनाव शुरू होने से पहले ही खींची गई थी, लेकिन चुनाव के दरम्यान प्रदेश अध्यक्ष अमित शाह का बयान आया था कि भारतीय जनता पार्टी में ऐसा कोई भी नियम और कानून नहीं बना है और न ही कोई रिवाज है कि 75 साल पूरी कर चुके व्यक्ति को चुनाव लड़ने से रोका जायेगा। दरअसल कर्नाटक में येदियुरप्पा सियासी पिच पर मास्टर स्ट्रोक लगाने के माहिर है,ं साथ ही ये बात भी किसी से छिपी नहीं है कि येदियुरप्पा मोदी जी के निकटस्थ होने के साथ आर.एस.एस के भी कृपा पात्र हैं। दूसरी सबसे बड़ी बात तो ये है कि येदियुरप्पा को लिंगायत समुदाय का समर्थन प्राप्त है वहीं सियासी विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक में भाजपा के सबसे चहेते चेहरे के रूप में येदुरप्पा का कोई सानी नहीं है। बहरहाल कर्नाटक में कई दिनों तक चले हाई वोल्टेज ड्रामें का पटाक्षेप हो गया और येदियुरप्पा कर्नाटक के नये ‘स्वामी’ के तौर पर सम्भवतः आज शपथ ले लेंगे। मूल सवाल ये है कि भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं जिनमें कई बड़े नाम शुमार है उम्र की सीमा रखकर उनके चुनाव लड़ने की लालसा को खत्म कर दियागया था क्यों ? लेकिन फिर अपने ही नियम और कानून को तिलांजली देने वाले शाह और मोदी की जोड़ी ऐसे एक नहीं कई कानून बनाकर अपने रास्ते को साफ करने की कला के मास्टर हैं इसमें कोई शक नहीं ।

सलीम रज़ा लेखक

देहरादून,उत्तराखण्ड

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