मंदी की वजह से अप्रैल से अब तक गईं 3.5 लाख नौकरियां

ऑटो सेक्टर 7 फीसदी तक जीडीपी में देता है योगदान

3.5 करोड़ लोगों को मिलता है रोजगार

इंडस्ट्री से जुडे़ एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि इस सेक्टर को पटरी पर लाने के लिए, ऑटो जगत से जुड़े अधिकारियों ने बुधवार को वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक की योजना बनाई है। इस बैठक में डीलरों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए वित्तपोषण में कर कटौती और आसान पहुंच की मांग पर जोर होगा ।ऑटोमोटिव कॉम्पोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA), व्यापार मंडल के महानिदेशक, विन्नी मेहता ने इस बात को उजागर किया था कि ऑटो सेक्टर मंदी के दौर से गुजर रहा है।

ऑटो सेक्टर में मंदी रुख बरकरार है. ऐसे में कई स्रोतों से जानकारी मिली है कि कारों और मोटरसाइकिलों की बिक्री में कमी से ऑटो सेक्टर में बड़े पैमाने पर नौकरियों की कटौती हो रही है।कई कंपनियां अपने कारखानों को बंद करने के लिए मजबूर हैं। इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि शुरुआती अनुमानों से पता चलता है कि वाहन निर्माता, कल-पुर्जे निर्माता और डीलर अप्रैल से अब तक करीब 3,50,000 कर्मचारियों की छंटनी कर चुके हैं। एक सूत्र ने कहा कि कार और मोटरसाइकिल निर्माताओं ने 15,000 और कल-पुर्जे निर्माताओं ने 1,00,000 लोगों को निकाला है, जबकि बाकी नौकरियां डीलर स्तर पर गईं हैं।

बजाज ऑटो की कुल बिक्री जुलाई महीने में पांच प्रतिशत गिरकर 3,81,530 वाहनों पर आ गयी। कंपनी ने खुद एक बयान में इसकी जानकारी दी है. पिछले साल जुलाई में बजाज ने जहां 4,00,343 वाहनों की बिक्री की थी।वहीं इस दौरान उसकी घरेलू बिक्री पिछले साल के 2,37,511 वाहनों की तुलना में 13 प्रतिशत गिरकर 2,05,470 वाहनों पर आ गयी।

मांग घटने के बाद जापानी मोटरसाइकिल निर्माता यामाहा मोटर और फ्रांस के वैलेओ और सुब्रोस सहित ऑटो कॉम्पोनेंट्स के निर्माताओं ने लगभग 1,700 अस्थायी श्रमिकों को निकाला है। जापान के डेंसो कॉर्प और सुज़ुकी मोटर कॉर्प की हिस्सेदारी वाली सुब्रोस ने 800 कर्मचारियों को निकाला है।घरेलू पार्ट्स निर्माता कंपनी वी गी जी कौशिको ने 500 लोगों को नौकरी से हटाया है, जबकि यामाहा और वैलेओ ने पिछले महीने 200 लोगों की छंटनी की है। इस बीच खबर यह भी है कि ऑटोमोटिव सप्लायर व्हील्स इंडिया अपने अस्थायी कर्मचारियों की संख्या में 800 की कटौती कर सकती है और उसने इसके लिए तैयारियां शुरु भी कर दी हैं।

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने पिछले छह महीनों में अपने अस्थायी कर्मचारियों की संख्या में 6 प्रतिशत की कटौती की है। टाटा मोटर्स ने पिछले दो हफ्तों में अपने चार संयंत्रों को बंद कर दिया है। जबकि महिंद्रा ने कहा है कि अप्रैल और जून के बीच उसके विभिन्न संयंत्रों में करीब 5 से 13 दिनों तक कोई प्रॉडक्शन ही नहीं हुआ।सूत्रों ने बताया कि होंडा ने 16 जुलाई से राजस्थान में अपने प्लांट में कुछ कार मॉडल का प्रॉडक्शन बंद कर दिया है और 26 जुलाई से 15 दिनों के लिए ग्रेटर नोएडा में अपने दूसरे संयंत्र में पूरी तरह से मैन्युफैक्चरिंग को रोक दिया है।

बता दें देश की जीडीपी में 7 फीसदी से अधिक का योगदान देने वाले ऑटो सेक्टर को इन दिनों अपनी सबसे खराब परिस्थितियों में से एक का सामना करना पड़ रहा है। अनुमान है कि ऑटो सेक्टर में गिरावट से मंदी की मार बढ़ सकती है।दरअसल यह सेक्टर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जो मैन्युफैक्चरिंग प्रॉडक्शन सेक्टर में मिलने वाली नौकरियों का लगभग आधा हिस्सा है।एक निजी डेटा समूह सीएमआईई के अनुसार जुलाई 2019 में बेरोजगारी की दर बढ़कर 5.66 से बढ़कर 7.51 प्रतिशत हो गई। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के लिए ऑटो सेक्टर में मंदी सबसे ज्यादा बड़ी चुनौती साबित होती नजर आ रही है।

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