वर्तमान समय में मीडिया की अहमियत किसी से छिपी हुई नहीं है ऐसा कहना अनुचित ने होगा कि आज हम मीडिया युग में जी रहे हैं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक रंग में मीडिया ने अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया है लेकिन आज पत्रकारों पर अत्याचार हो रहे हैं जगह-जगह उनका उत्पीड़न किया जा रहा है वर्तमान में हो रहे पत्रकारों पर हमले व उत्पीड़न से पत्रकारिता खतरे में है जोकि अनुच्छेद 19 का खुला उल्लंघन है जैसा कि सब जानते हैं कि लोकतंत्र में पत्रकार और पत्रकारिता दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है पत्रकार और पत्रकारिता लोकतंत्र से जुड़ी विधायिका कार्यपालिका और न्यायपालिका को निरंकुश होने से बचाते हैं पत्रकार और पत्रकारिता समाज और सरकार के बीच एक ऐसा दोहरा आईना माना जाता है जिसमें सरकार और समाज दोनों अपना-अपना स्वरूप देख कर उसमें सुधार कर सकते हैं पत्रकार और पत्रकारिता को समाज के दबे कुचले बेजुबान लोगों की जुबान माना जाता है और अन्याय उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज बुलंद करने का एक सशक्त माध्यम माना गया है पत्रकारिता और पत्रकार का इतिहास बहुत पुराना और सभी युगों में रहा है पत्रकारिता व्यवसाय नहीं बल्कि एक समाज सेवा और ईश्वरीय कार्य करने का सशक्त माध्यम माना गया है पत्रकार समाज और सरकार की तस्वीर प्रस्तुत करके वास्तविकता से परिचय कराते हैं पत्रकारिता के क्षेत्र में पत्रकार की भूमिका निभाना आजकल दुशवार हो रहा है क्योंकि पत्रकारिता के क्षेत्र में समाज द्रोही अराजक तत्व भ्रष्ट सभी पत्रकारों को अपना दुश्मन मानने लगे हैं क्योंकि हर क्षेत्र में पत्रकारिता लोकतंत्र की परहरि बनी हुई है समाज में आई गिरावट का प्रभाव पत्रकारिता पर भी पड़ा है इसके बावजूद अभी भी हमारे तमाम पत्रकार साथी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पत्रकारिता को गौरवान्वित कर सार्थकता प्रदान कर रहे हैं लेकिन अब पत्रकारों का मान-सम्मान कम होता जा रहा है जब निष्पक्ष पत्रकारिता के चलते हैं पत्रकार की जान पर बन आती है तब सभी साथ छोड़ कर चले जाते हैं इसके बावजूद हमारे पत्रकार साथी अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटते लेकिन इन कर्तव्य पालन में जरा सी चूक होने पर जान चली जाती है आपको बता दें वर्तमान में पत्रकारों की स्थिति बड़ी दयनीय हो गई है और पत्रकारों पर जानलेवा हमलों का दौर शुरू हो गया है जो सरकार के लिए बड़ी शर्म की बात है उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं वे झूठे मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं पत्रकारों को चौथा स्तंभ कहने मात्र से उनकी स्थिति में सुधार नहीं आने वाला लोकतंत्र और तीनों स्तंभों की तुलना में चौथे स्तंभ के साथ सौतेला व्यवहार कोई नई बात नहीं है लोकतंत्र में तीन स्तंभ विधायिका कार्यपालिका व न्यायपालिका में भ्रष्ट होने पर इन्हें अगर किसी का डर है तो वह पत्रकार पत्रकारिता से होता है यही कारण है कि पत्रकार के हित की सिर्फ बात की जाती है उसे अमलीजामा नहीं पहनाया जाता जिससे पत्रकारिता खतरे में पड़कर बदनाम होने लगी है पत्रकारों पर निरंतर प्रहार होने से पत्रकारों के उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ती जा रही है इसके चलते हैं पत्रकारों को निष्पक्ष कवरेज करना मुश्किल हो रहा है शासन और प्रशासन निरंतर पत्रकारों की सुरक्षा का ढिंढोरा पीट रहा है प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कई बार कहा कि पत्रकारों के साथ बदसलूकी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा लेकिन सरकार के इस आदेश का किसी भी सासनी के प्रशासनिक अधिकारी पर कोई फर्क नहीं पड़ता है प्रदेश के डीजीपी ने भी हाल ही में एक प्रेस नोट जारी कर आदेशित किया था कि पत्रकारों का सम्मान किया जाये लेकिन कुछ भ्रष्ट अधिकारी इन आदेशों का पालन ना करने में देरी नहीं करते आपको बता दें की संविधान ने पत्रकारों को कुछ विशेष अधिकार दिए हैं जो कि आम जनता को नहीं प्राप्त है वह वरिष्ठ अधिकारियों नेताओं मशहूर हस्तियों और अन्य व्यक्तियों के साक्षात्कार कर सकते हैं इसके अलावा वे पत्रकार जो की सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हैं उन पत्रकारों को सरकार द्वारा विशेष संरक्षण दिया जाता है जो उनकी पहचान बनाए रखने में मदद करता है और साथ ही प्रेस की स्वतंत्रता का भी विस्तार करता है प्रेस की स्वतंत्रता पत्रकारों का संवैधानिक अधिकार हैं

शुभम बाजपाई

R.b.news

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