नई दिल्ली — उच्चतम न्यायालय गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की साल 2003 में हत्या करने के आरोपों का सामना कर रहे 12 लोगों को बरी करने के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई और गुजरात सरकार की अपीलों पर आज न्यायाधीश अरुण मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ एनजीओ ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ (सीपीआईएल) की जनहित याचिका पर भी फैसला सुनायेगी ।

गुजरात में नरेंद्र मोदी की सरकार के समय में तत्कालीन गृह मंत्री हरेन पांड्या की 26 मार्च 2003 को अहमदाबाद के लॉ गार्डन इलाके में उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जब वह सुबह की सैर कर रहे थे। विशेष पोटा अदालत ने 2007 में सभी 12 आरोपियों को दोषी ठहराते हुये उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी जबकि 29 अगस्त 2011 को गुजरात हाई कोर्ट ने सेशनकोर्ट के फैसले को पलटते हुये सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। तब सीबीआई ने 2012 में हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

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