निर्माता ऑटो पार्ट् न खरीदने के कारण ऑटोपार्ट निर्माता का पार्ट बनाने की छमता कम की है।जिसके कारण वहाँ नौकरी का खतरा बड़ता जा रहा है।वाहन बिक्री के असर से उत्पादन में कमी के बाद देश के ऑटो सेक्टर में नौकरियों की मांग घटने लगी है। जून में इस क्षेत्र की रोजगारों की संख्या जनवरी के मुकाबले 20 फीसदी तक घट गई है। ऑटो सेक्टर में बिक्री और उत्पादन दोनों मोर्चे पर आई गिरावट को देखते हुए फिलहाल पूरे सेक्टर में नई भर्तियां थम सी गई हैं। हालांकि आने वाले दिनों में जिस तरह सरकार ई-वाहन को बढ़ावा दे रही है, उससे नई नौकरियों के बड़े मौके दिखेंगे। मांग न होने की वजह से कार, दोपहिया और यहां तक कि व्यावसायिक वाहनों की बिक्री में गिरावट आई है। इससे कंपनियों ने उत्पादन भी धीमा कर दिया है और कुछ गाड़ियों का उत्पादन तो बंद भी कर दिया गया है।

लगभग 1million नौकरी जाने का खतरा है ,जॉब्स प्लेटफॉर्म ग्लोबल हंट के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील गोयल ने संवाददाता को बताया है कि बिक्री और उत्पादन घटने का नई नौकरियों पर असर पड़ा है। लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में नई नौकरियों की मांग बिल्कुल भी नहीं है। ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार की नीतियों में स्पष्टता न होने से हालात बिगड़ रहे हैं। सरकार ने बीएस 6 इंजन वाली गाड़ियों को बनाने के लिए दिशानिर्देश जारी किया है इसके बाद ऑटो इंडस्ट्री ने बड़ी रकम निवेश कर इसकी तकनीक तैयार करनी शुरू की थी। लेकिन अब सरकार का फोकस इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर बढ़ रहा है।

भारत के NGT के आदेश के अनुसार देश में 2020 मेंBS 6 कॉम्पलैन्स ही ऑटोमोबाइल में मान्य होंगे ऐसे में BS6 इंजन का निवेश कंपनियों के लिए सिरदर्द बन गया है। वहीं ऊंचे टैक्स लगे होने के चलते इलेक्ट्रिक गाड़ियों का उत्पादन भी देश में महंगा होता जा रहा है याननी वहां भी राहत नहीं है। ऐसे में इंडस्ट्री को लगता है कि सरकार पहले इस दिशा में कुछ सफाई दे तभी वो नया उत्पादन करेंगी। वैसे तो ऑटो सेक्टर देश भर में चार करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है लेकिन पिछले साल सितंबर में गाड़ियों की बिक्री गिरनी शुरू हुई तो वो बढ़ने का नाम नहीं ले रही है।

सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के आंकड़ों के मुताबिक जून महीने 25 फीसदी कम कारें बिकी हैं। सरकार की सफाई के इंतजार में फिलहाल ऑटो कंपनियों ने भी अपनी सभी विस्तार योजनाओं पर ब्रेक लगा दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर डीलरों पर पड़ा हैं। आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल में 350 के करीब डीलरशिप बंद हो गई हैं और करीब 4 हजार लोग बेरोजगार हुए हैं।

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